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प्रस्तावना

स्थानीय स्वायत्त शासन की निकाय के रूप में ग्राम पंचायतें भारत में पुरातनकाल से विद्यमान है । भारत के संविधान के प्रणेताओं ने भारत की ग्रामीण प्रशासन व्यवस्था में पंचायत के महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों की स्थापना करने तथा उन्हें पर्याप्त शक्तियां और अधिकार प्रदान करने हेतु राज्य की नीति के एक निर्देशन जारी किये हैं । संविधान के 73वें संशोधन के माध्यम से भारत में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था हेतु प्रावधान किया गया है, जिसके द्वारा विभिन्न पंचायतों हेतु निर्वाचन नियत समय पर कराना तथा उन्हें अपने कर्तत्यों के निष्पादन करने हेतु पर्याप्त शक्तियां प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है । ग्राम अथवा ग्राम समूह स्तर पर ग्राम-पंचायत, जिला स्तर पर जिला-पंचायत तथा मध्यवर्ती स्तर पर खण्ड (जनपद) पंचायत का गठन प्रावधानित किया गया है । साथ-साथ इन त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन नियमित रूप से 5 साल के अन्तराल में कराना सुनिश्चित भी किया गया है ।
संविधान के 74वें संशोधन के माध्यम से संविधान में नगरीय क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र की पंचायतों की सदृश्य स्वायत्त शासन की ईकाइयों का प्रावधान किया गया है जिसके अनुसार नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुसार नगरपालिक निगम, नगरपालिका परिषद तथा नगर पंचायत का गठन सुनिश्चित किया गया है । इन नगरीय निकायों हेतु निर्धारित समयावधि में अनिवार्यतः निर्वाचन सुनिश्चित करने का भी प्रावधान किया गया है ।
ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के निर्वाचन नियमित तथा नियत समय पर सम्पन्न कराने हेतु संविधान के अनुच्छेद 243-ट एवं 243-य क द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसमें पंचायतों एवं नगरीय निकायों के लिए कराये जाने वाले सभी निर्वाचन के लिए निर्वाचन नामावलियां तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण का दायित्व न्यस्त किया गया है । राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा करने का प्रावधानित किया गया तथा यह भी प्रावधानित किया गया है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से उसी रीत से तथा उन्हीं आधार पर ही हटाया जा सकता है जिस रीत से और जिन आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जाता है, ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपने सांविधानिक दायित्व का निर्वहन कर सकें। राज्य निर्वाचन आयुक्त के कार्य को प्रभावी ढंग से निष्पादन करने हेतु उनके अनुरोध पर राज्य के राज्यपाल द्वारा उन्हें आवश्यक कर्मचारीवृन्द उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है ।
छत्तीसगढ़ में 28 सितम्बर, 2002 को छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया है । डॉ. सुशील त्रिवेदी ने दिनांक 1 अक्टूबर, 2002 को प्रथम राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल में राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य में पहला उप-निर्वाचन (पंचायत) मई-जून, 2003 में सम्पन्न कराया । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के प्रथम आम निर्वाचन नवम्बर-दिसम्बर, 2005 में सम्पन्न कराये गये । राज्य के द्वितीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में श्री शिवराज सिंह ने दिनांक 30 सितम्बर .2008 को पदभार ग्रहण किया था । इनके कार्यकाल में राज्य निर्वाचन आयेाग द्वारा जनवरी-फरवरी, 2010 में पंचायतों एवं नगरीय निकायों के आम निर्वाचन सम्पन्न कराये गये हैं । श्री शिवराज सिंह द्वारा अपने पद से दिनांक 31 मई .2010 को त्याग-पत्र दिया गया । राज्य के तृतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में श्री पी.सी.दलेई दिनांक 29 जून, 2010 से दिनांक 23 अगस्त, 2016 तक कार्यरत रहे । वर्तमान में ठाकुर राम सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में दिनांक 23 अगस्त, 2016 से पदासीन हैं । राज्य में पंचायतों एवं नगरीय निकायों के चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने का दायित्व राज्य निर्वाचन आयेाग में न्यस्त किया गया ।